रायगढ़: नवजात से लेकर नाबालिक तक सब के साथ खड़ा है चाइल्ड लाइन

 रायगढ़: नवजात से लेकर नाबालिक तक सब के साथ खड़ा है चाइल्ड लाइन

नवजात से लेकर नाबालिक तक सब के साथ खड़ा है चाइल्ड लाइन

कोरोना संक्रमण काल में जिम्मेदारी से हर मोर्चे पर डटा है 1098

रायगढ़, अक्टूबर 03।

“पापा काम पर नहीं जा रहे, पूरा वक़्त हमारे साथ रहते हैं। यही मैं चाहती थी। लेकिन अब मेरे पापा-मम्मी दिन भर झगड़ते हैं। मरने-मारने की बात भी सुनाई देती है।

कई बार हम पूरा दिन बिना खाये सोये हैं। मैं अब घर में नहीं रहूंगी। ऑनलाइन क्लास के लिए मिले मम्मी के फ़ोन से बोल रही हूँ, मैं यहाँ से भागकर कहाँ जाऊं।”

ऐसी कई कॉल चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन नंबर दस नौ आठ (1098) पर आती हैं। ख़ासकर इस लॉकडाउन में मानसिक रूप से प्रताड़ित बच्चों के कई कॉल आये। उन्हें सही समय पर दस नौ आठ के परामर्शदाताओं ने परामर्श दिया और उन्हें इस भय और अवसाद से बाहर निकाल कर उनकी मुश्किल हल की|  इस दौरान 12 मेडिकल केस को सुलझाया गया, 16 बच्चों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया, शारीरिक छेड़खानी के 12, और 10 रिस्टोरेशन के मामले सामने आये  आए। दो  नवजात को हॉस्पिटल में देखभाल इसी चाइल्ड लाइन द्वारा की गई जिसमें 1 कार्डिनेटर, 1 काउंसलर, 6 टीम मेंबर और 1 वॉलिंटियर हैं।

बीते 6 महीने से जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के साथ कदम से कदम मिलाकर कोरोना संक्रमण की रोकथाम  के लिए चाइल्ड लाइन ने काम किया है।

लॉकडाउन में सिर्फ आपातकालीन सेवाओं को छूट मिली थी जिसमें चाइल्ड लाइन भी शामिल था। सफेद एप्रन में 1098 के कार्यकर्ताओं ने  मास्क लगाने की उपयोगिता हो या फिर स्वच्छता संदेश या फिर स्वास्थ्य की जांच यह  कोरोना फाइटर्स पूरी जिम्मेदारी से खड़े हैं।

चाइल्ड लाइन की काउंसलर विनिता तिवारी बताती हैं कोरोना संक्रमण के दौर में बच्चों को  मानसिक रूप से प्रताड़ित करने के कई कॉल आये। “जब हम समझाने भी गए तब भी पति-पत्नी लड़ते ही रहे। शायद ऐसा पहली बार हुआ है कि दो लोग एक साथ इतना वक़्त एक साथ बिता रहे हों। ‘’

“बच्चों के मायूस, और बोर होने जैसे कई कॉल आये। वह जल्द से जल्द स्कूल जाना चाहते है और अपना पुराना शेड्यूल वापस चाहते हैं। उन्हें घर में सुरक्षित बने रहने की सलाह हम बार-बार देते हैं। कई बच्चों को हम उदाहरण के माध्यम से कोरोना को भयावहता को बताते है तो कई को विजुअल दिखाया,’’ विनीता बताती है ।

चाइल्ड लाइन क्या है?

हेल्पलाइन नंबर 1098, चाइल्ड लाइन के नाम से जानी जाती है जो बच्चों के हितों की रक्षा के लिए, और संकट में फंसे बच्चों के लिए पूरे सप्ताह चौबीसों घंटे चलने वाली सतत निःशुल्क टेलीफोन सेवा है। यह संस्था अनाथ,निराश्रित तथा स्कूल न जा सकने वाले गरीब बच्चों की सहायता करती है। 1098 में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय, भारत सरकार, सी.आई.एफ. को देश भर में चाइल्डलाइन 1098 की शुरुआत और इसे बनाए रखने के लिए नोडल एजेंसी के रूप में नियुक्त किया है।

बच्चों की स्वास्थ्य जांच हमारी प्राथमिकता : डायरेक्टर यादव

चाइल्ड लाइन, रायगढ़ के डायरेक्टर श्याम सुंदर यादव बताते हैं  कोरोना काल में जन जागरूकता, सर्वे, डोर-टू-डोर कैंपेन और काउंसिलिंग कर रहे हैं। बाकी चाइल्ड लाइन हेल्पलाइन 1098,  नवजात से नाबालिक बच्चों के लिए या चरम आपात स्थिति में 25 साल तक की उम्र के है जो  इस दायरे में आते हैं। संबंधित बच्चे के 1098 डायल करने के बाद एक चाइल्ड लाइन सदस्य कॉल की नेचर के अनुसार उचित सहायता प्रदान करता है।

“जो भी केसेस हमारे आते हैं उनकी स्वास्थ्य जांच हमारी प्राथमिकता में रहती है। अनाथ, भटकते, शारीरिक छेड़खानी वाले बच्चों की पहले स्वास्थ्य जांच कराई जाती है। कोविड के दौर में कोरोना टेस्ट भी हम लगभग सभी बच्चों का कराते हैं,’’ डॉ यादव ने बताया ।

चाइल्ड लाइन पर फोन करने वालों की सेवाओं के लिए इमोशनल सपोर्ट और मार्गदर्शन, सूचना और सेवाओं के रेफरल के परामर्श देने की व्यवस्था की जाती हैं। संकटग्रस्त बच्चे की कॉल प्राप्त करने के 60 मिनट के अंदर एक चाइल्डलाइन टीम बच्चे के पास पहुँचती है और उचित सहायता प्रदान करती है।

rj ramjhajhar

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