राजनांदगांव: फसल बीमा में क्षतिपूर्ति राशि का निर्धारण

 राजनांदगांव: फसल बीमा में क्षतिपूर्ति राशि का निर्धारण

फसल बीमा में क्षतिपूर्ति राशि का निर्धारण


राजनांदगांव 26 सितम्बर 2020। जिले में चालू खरीफ में कुल 3 लाख 71 हजार हेक्टेयर में खरीफ  की विभिन्न फसलें किसानों के द्वारा ली गई है। जिसमें से फसल बीमा योजना के तहत 2 लाख 6 हजार 70 कृषकों के कुल 2 लाख 95 हजार 497 हेक्टेयर अधिसूचित फसल को बीमा आवरण में शामिल किया गया है। जिले में खंड वर्षा एवं प्राकृतिक आपदाओं से निरंतर फसलों को अधिक प्रभाव पड़ा है, जिसके कारण गत वर्ष की तुलना में इस वर्ष अधिक किसान योजना से जुड़े है।
किसानों में भ्रम की स्थिति –
विगत वर्षो से किसानों में भ्रम की स्थिति है कि फसल बीमा प्रीमियम राशि देने के बाद बीमा राशि मिलना है, परन्तु ऐसा नहीं है। योजना में बीमा इकाई ग्राम निर्धारित है, जिसमें क्षतिपूर्ति राशि का निर्धारण बीमित फसल में आयोजित 4 फसल कटाई प्रयोग से प्राप्त औसत उपज का थ्रेस होल्ड उपज (विगत 5 वर्षों का उच्चतम उपज) से तुलना उपरांत क्षति प्रतिशत के आधार पर निर्धारण होता है। धान सिंचित एवं धान असिंचित में अलग-अलग फसल कटाई प्रयोग आयोजित किया जाता है तथा प्रत्येक बीमित ग्राम के बीमित फसल में निर्धारित संख्या में फसल कटाई प्रयोग आयोजित कर क्षति प्रतिशत का अलग-अलग निर्धारण होता है।
प्राकृतिक आपदाओं से क्षति का मूल्यांकन-
योजना के प्रावधान अनुसार फसल की क्षति का मूल्यांकन एवं क्षति पूर्ति का निर्धारण जिला एवं तहसील स्तर पर गठित संयुक्त समिति द्वारा किया जाता है।  स्थानीय आपदा की स्थिति में – स्थानीय जोखिम जैसे-ओलावृष्टि, भू-स्खलन, जलप्लावन से अधिसूचित फसल में नुकसान होने की स्थिति में व्यक्तिगत बीमित कृषकों को क्षतिपूर्ति दिये जाने का प्रावधान है। यदि किसी प्रभावित इकाई में 25 प्रतिशत से ज्यादा हानि होती है, तो संयुक्त समिति द्वारा सैम्पल जांच कर उस इकाई में सभी बीमित कृषकों को क्षतिपूर्ति देय होगी। कृषक इसकी सूचना बीमा कंपनी, कृषि विभाग, राजस्व विभाग को लिखित रूप से निर्धारित समय सीमा 72 घंटे के भीतर बीमित फसल के ब्यौरे, क्षति की मात्रा एवं क्षति के कारण सहित सूचित करेंगे। धान फसल में जल प्लावन इस प्रावधान में शामिल नहीं है। फसल कटाई के उपरांत खेत में सुखाने के लिये फैलाकर रखी हुई फसल में नुकसान होने की स्थिति में- फसल कटाई की निर्धारित अंतिम तिथि से यदि कटी हुई अधिसूचित फसल अधिकतम 14 दिनों तक सूखाने के लिए खेत में कटी या फैली हुई स्थिति में रखी जाती है तो प्राकृतिक आपदा जैसे- चक्रवात, चक्रवाती वर्षा एवं बेमौसम वर्षा से 25 प्रतिशत से अधिक अधिसूचित क्षेत्र में फसल की क्षति होने की सूचना 72 घंटे के भीतर लिखित रूप से/ई-मेल के माध्यम से फसल क्षति की मात्रा तथा क्षति के कारण सहित सूचित करेंगे। फसल पैदावार के आधार व्यापक क्षति की स्थिति में – फसल उत्पादन आंकलन के लिए अधिसूचित बीमा इकाई में मुख्य एवं अन्य फसल के लिए 4 प्रयोग सम्पादित किये जाएंगे। फसल उत्पादन के आंकलन के लिए अधिसूचित बीमा इकाई ग्राम में फसल कटाई प्रयोग आयोजित करने के उपरांत प्रयोग से प्राप्त वास्तविक उपज, थ्रेस-होल्ड उपज से कम प्राप्त होने पर बीमित किसानों को बीमित राशि के आधार पर दावा भुगतान किया जाएगा। वास्तविक उपज, थ्रेसहोल्ड उपज से अधिक होने पर दावा भुगतान की पात्रता नहीं होगीÓÓ।
किसानों से आग्रह किया गया है कि प्राकृतिक आपदाओं से फसल को नुकसान होने पर क्षति के ब्योरा सहित तत्काल बीमा कंपनी, कृषि विभाग, राजस्व विभाग को लिखित में सूचित करें। सोयाबीन फसल क्षेत्रों में कुछ दिनों में फसल कटाई प्रयोग किया जाना है। बीमित क्षेत्र एवं फसल वाले किसान संबंधित क्षेत्र के पटवारी व ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी से सम्पर्क कर फसल कटाई प्रयोग में शामिल होवे।

rj ramjhajhar

rj ramjhajhar

Related post