मुंगेली: कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने खेतो का निरीक्षण कर किसानों को दी  भूरा माहो कीट से फसल को बचाने की सलाह

 मुंगेली: कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने खेतो का निरीक्षण कर किसानों को दी  भूरा माहो कीट से फसल को बचाने की सलाह

धान के फसल में भूरा माहो कीट का प्रकोप

कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों ने खेतो का निरीक्षण कर किसानों को दी  भूरा माहो कीट से फसल को बचाने की सलाह

मुंगेली 01 अक्टूबर 2020//   जिले में वर्तमान समय में वातारण में उमस होने के कारण धान के फसल में भूरा माहो का कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। यह प्रकोप खास कर मध्यम से लंबी अवधि की धान में दिख रहा है। इसे देखते हुए  कृषि विज्ञान केंद्र मुंगेली के वैज्ञानिकों ने किसानों के खेतों का निरीक्षण किया और उन्होने धान फसल को भूरा माहो से बचाने के लिए किसानों को सलाह दी है। उन्होने किसानों से भूरा माहो एवं उसके लक्षण के संबंध में कहा है कि भूरा माहो को बीपीएच ब्राउन प्लांट हार्पर या भूरा फदका भी कहा कहा जाता है। इस कीट की अंडा, शिशु व प्रौढ़ तीन अवस्था होती है। शिशु व प्रौढ़ दोनों अवस्था धान के पौधे के तने से रस चुसकर बहुत तेजी से फसल को नुकसान पहुचाती है। एक कीट का जीवन चक्र 28 से 33 दिनों का होता है। शिशु का रंग मटमैला भूरा, वहीं प्रौढ़ का रंग हलका भूरा होता है। प्रौढ़ की तुलना में शिशु तेजी से पौधे का रस चुसता है। भूरा माहो कीट सीधा नहीं चलता है, तिरछा फुदकता है। इसके प्रारम्भिक लक्षण में जहां की धान घनी है, खाद ज्यादा है वहां अधिकतर दिखना शुरू होता है। जिसमें अचानक पत्तियां गोल घेरे में पीली व भूरे रंग की दिखने लगती है व सूख जाती है व पौधा गिर  जाता है। जिसे होपर बर्न कहते हैं। यह कीट पानी की सतह के ऊपर तने से चिपककर रस चूसता है। इसके नियंत्रण के लिए खेतों में फसल के अवशेषों व खरपवारों को नष्ट करें। कीट के प्रकोप बहुत ज्यादा या उग्र होने पर खेतों से पानी निकाल दें। जैविक नियंत्रण के लिए खेत में मकड़ी मिरीड बग डेमस्ल फ्लाई मेढक मछली का संरक्षण करें जो इस कीट के प्रौढ़ व शिशु को शुरूआत में ही भक्षण करते हैं। नीम का तेल 2500 या ज्यादा पीपीएम वाला एक लीटर प्रति एकड़ की दर से सुरक्षात्मक रूप से या कीट प्रारम्भ होते ही छिड़काव करें। रासायनिक नियंत्रण के लिए बाजार में  बहुत सी दवा उपलब्ध है। जैसे इमिडाक्लोप्रीड 17.8 एस.एल. 60-90 मिली. अथवा डाईनोटेफ्यूरोन 20 प्रतिशत एस.जी. 60 ग्राम प्रति एकड अथवा ट्राईफ्लूमेजोंपाइरीम 10 प्रतिशत एस.सी. 94 मिली. प्रति एकड़ की दर से छिड़काव करे।  कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को सलाह दी गई कि वे दवा का उपयोग बहुत ही सोच समझकर करें , क्योकि इस कीट में दवा के प्रति बहुत जल्दी प्रतिरोधकता आती है। हवा के दिशा में दवा डाले, मुंह में कपड़ा अवश्य बांधे और दवा का छिडकाव करते समय पुरे कपड़े पहने।

rj ramjhajhar

rj ramjhajhar

Related post