मरवाही : मरवाही नगर पंचायत बनाने का विरोध,राजभवन में राज्यपाल की सुनवाई में दर्ज कराई गई आपत्ति,मरवाही पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का हिस्सा ,नगर पंचायत बनाने के लिए राज्यपाल की अनुमति जरूरी

 मरवाही : मरवाही नगर पंचायत बनाने का विरोध,राजभवन में राज्यपाल की सुनवाई में दर्ज कराई गई आपत्ति,मरवाही पांचवीं अनुसूची क्षेत्र का हिस्सा ,नगर पंचायत बनाने के लिए राज्यपाल की अनुमति जरूरी

मरवाही उपचुनाव में राजनैतिक लाभ उठाने सरकार ने की गठन की घोषणा

खासखबर बिलासपुर। पांचवी अनुसूचित क्षेत्र जिला गौरेला पेंड्रा मरवाही के ग्राम पंचायत मरवाही को छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नगर पंचायत बनाने के मामले में राज भवन रायपुर में राज्यपाल द्वारा की गई सुनवाई में आपत्ति करता पेंड्रा के अधिवक्ता जगदंबा प्रसाद अग्रवाल एवं किसान नेता रामनिवास तिवारी पेंड्रा ने राज्यपाल के समक्ष उपस्थित होकर आपत्ति दर्ज कराई और कहां कि यदि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार की मंशा है कि मरवाही का विकास किया जाए तो मरवाही को नगर पंचायत बनाने के साथ जिला मुख्यालय भी बनाया जाए, तथा जिले के सभी कार्यालय मरवाही में खोले जाएं ताकि मरवाही का समुचित विकास हो सके। पांचवी अनुसूचित क्षेत्र ग्राम पंचायत मरवाही के गठन को लेकर राजभवन रायपुर में राज्यपाल सुश्री अनुसुइया उईके द्वारा 29 सितंबर को छत्तीसगढ़ सरकार के सभी संबंधित विभाग के अधिकारियों को बुलाया था तथा इस संबंध में अधिकारियों से जवाब तलब किया। इसी परिपेक्ष में मरवाही नगर पंचायत के गठन को लेकर आपत्ति करने वाले पेंड्रा के अधिवक्ता जगदंबा प्रसाद अग्रवाल एवं किसान नेता रामनिवास तिवारी ने राज्यपाल के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि चुकी नगर पंचायत के गठन की कार्यवाही आदिवासी परियोजना क्षेत्र में की गई है जिसके कारण आपत्तियों पर ध्यान दिलाना जरूरी है। आपत्ति करता हूं ने कहा कि मरवाही को नगर पंचायत बनाने के पूर्व प्रदेश स्तरीय आदिवासी मंत्रणा परिषद जिसकी अध्यक्ष स्वयं महामहिम राज्यपाल है उनकी राय नहीं ली गई तथा पांचवी अनुसूची के अनुसार आदिवासी परियोजना क्षेत्र में मंत्रणा परिषद की अनुमति से यदि ग्राम पंचायत के स्थान पर नगर पंचायत का गठन भी किया जाता है तो उस नगर पंचायत क्षेत्र को जिला मुख्यालय घोषित किया जाना चाहिए जैसे सुकमा बीजापुर दंतेवाड़ा बलरामपुर आदि ग्राम पंचायतों को नगर पालिका घोषित कर वहां जिला मुख्यालय की घोषणा की गई है। आपत्ति कर्ताओं कहा थी जिन पंचायतों को समाप्त कर नगर पंचायत क्षेत्र में शामिल किया गया है जैसे लोहारी कुम्हारी वहां की ग्राम पंचायत के ग्राम सभाओं के प्रस्ताव भी नहीं लिए गए हैं। आपत्ति कर्ताओं ने कहा कि सरकार आदिवासियों की पक्षधर नहीं है जिसमें पांचवी अनुसूची के कुछ प्रावधानों का उल्लंघन हो रहा है। ग्राम मरवाही एवं लोहारी कुम्हारी ग्रामीण आबादी है जहां जीविकोपार्जन का साधन सिर्फ राष्ट्रीय रोजगार गारंटी मनरेगा है।

ऐसी स्थिति में मरवाही लोहारी तथा कुमारी के लगभग 5000 जॉब कार्ड धारी बेरोजगार हो जाएंगे वही आजीविका मिशन का काम सिर्फ ग्राम पंचायत क्षेत्र में लागू है इन गांवों में लगभग 30 से 40 महिला समूह है जो इस योजना से वंचित हो जाएंगे। मरवाएगी लोहारी कुम्हारी को मिलाकर नगर पंचायत बनाने से मकान टैक्स लागू होगा कम से कम समेकित कर तो लगेगा ही जो ग्रामीणों के लिए बोझ होगा। इन 3 गांव लोहारी कुमारी मरवाही को मिलाकर 30 वर्ग किलोमीटर का ग्रामीण क्षेत्र है जहां न्यूनतम आवश्यकताएं तो अभी भी उपलब्ध है परंतु नगरीय क्षेत्र की अपेक्षाओं को पूरा करना संभव नहीं होगा। उन्होंने कहा कि किन्ही भी प्रयासों से आदिवासी क्षेत्रों में गैर आदिवासियों की संख्या को बढ़ाना बसाना पांचवी अनुसूची की मंशा और प्रावधानों का उल्लंघन कहलाता है। अभी जिला स्तरीयकार्यालय जिसका नाम वन मंडल मरवाही गौरेला जल संसाधन मरवाही गौरेला ग्रामीण यांत्रिकी संभाग पेंड्रा विद्युत मंडल संभाग गौरेला लोक निर्माण विभाग संभाग पेंड्रा कार्यालय गौरेला के सभी जिला स्तरीय कार्यालयों का मुख्यालय बदलकर मरवाही स्थापित किया जाएगा, यदि नहीं तो फिर मरवाही कौन नगर पंचायत बनाने की घोषणा करके मरवाही ग्राम पंचायत की जनता को क्यों लॉलीपॉप दिया जा रहा है जबकि संवैधानिक रूप से यह संभव नहीं है। आपत्ति कर्ताओं ने राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडिया को दिए गए प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहां की विधानसभा उपचुनाव मरवाही को देखते हुए छत्तीसगढ़ राज्य सरकार झूठी घोषणाएं कर रही है। राज्यपाल ने आपत्ति कर्ताओं की सभी बातों को सुनकर नगर पंचायत गठन पर रोक लगाने की बात की है।

rj ramjhajhar

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